Somvati Amavasya

सोमवती अमावस्या,
सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ओंकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी l
जिस अमावस्या को सोमवार हो, उसी दिन इस व्रत का विधान है।
प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है, परंतु ऐसा बहुत ही कम होता है,
जब अमावस्या सोमवार के दिन हो।
यह स्नान, दान के लिए शुभ और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
ग्रंथों में कहा गया है कि सोमवार को अमावस्या बड़े भाग्य से ही पड़ती है।
पाण्डव पूरे जीवन तरसते रहे, परन्तु उनके सम्पूर्ण जीवन में
सोमवती अमावस्या नहीं आई।
इस दिन को नदियों, तीर्थो में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है।
सोमवार चंद्रमा का दिन है।
इस दिन अमावस्या को सूर्य तथा चंद्र एक सीध में स्थित रहते हैं,
इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला होता है।
सोमवार भगवान शिवजी का दिन माना जाता है और
सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिवजी को समर्पित होती है।
इस दिन यदि गंगाजी जाना संभव न हो तो प्रात: किसी नदी या सरोवर आदि में स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करें।
अमावस्या के दिन वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है |

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