अक्षय तृतीया 2018: 18 अप्रैल को है अक्षय तृतीया, जानें इसके महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में

Akshay Tritya

 

अक्षय तृतीया 2018: 18 अप्रैल को देशभर में अक्षय तृतीया मनाई जा रही है. इस दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है. लेकिन सोने और अक्षय तृतीया का सचमुच आपस में कोई संबंध है. आज गुरूजी पवन सिन्हा बता रहे हैं अक्षय तृतीया और सोने के संबंध के बारे में. साथ ही जानिए अक्षय तृतीया के महत्व और इसके शुभ मुहूर्त के बारे में.
अक्षय तृतीया का महत्व –
गुरूजी के मुताबिक, सोने का अक्षय तृतीया के कोई संबंध नहीं है और ना ही विवाह का अक्षय तृतीया के कोई संबंध नहीं है. अक्षय तृतीया का संबंध कुपित ग्रहों को ठीक करने से है. अक्षय तृतीया के दिन साधना शुरू की जाती है. आमतौर पर अक्षय तृतीया को सोना खरीदने और छोटे बच्चों के विवाह का दिन माना जाता है. मान्यता है कि अक्षय तृतीया को बिना कुंडली मिलाएं शादी कर लेनी चाहिए. चलिए जानते हैं अक्षय तृतीया कैसे मनाई जाती है.

अक्षया तृतीया कैसे मनाएं-

• अक्षय तृतीया को विष्णुजी की पूजा की जाती है.

• कल के दिन से ऊं नारायण नमो नम: का जाप शुरू करें. घर के बिगड़े रिश्ते ठीक होंगे.

• अक्षय तृतीया को पूर्णमासी का व्रत शुरू करें.

• अक्षय तृतीया को चावल, आटा और तिल का दान करें.

• अक्षय तृतीया को लक्ष्मी जी की पूजा शुरू करने से लाभ होगा.

• जिनको लक्ष्मी जी की उपासना करनी हो वो अक्षय तृतीया को खीर, 5 फल, 5 सुपारी, शहद, भोजन और कपड़े दान करें.

क्यों खास है अक्षय तृतीया-

• अक्षय तृतीया पृथ्वी की सर्वोतम तिथियों में से एक है.

• अक्षय तृतीया को सही मुहूर्त में शादी करने से कमजोर बृहस्पति और शुक्र के प्रभाव कम हो जाते हैं.

• विष्णुजी के तीनों अवतार जैसे नर अवतार, परशुराम अवतार, हयग्रीव अवतार अक्षय तृतीया को हुए थे.

• अक्षया तृतीया को महाभारता का युद्ध समाप्त हुआ था.

• अक्षया तृतीया के दिन ही सुदामा ने श्रीकृष्ण से चावल प्राप्त किया था.

• अक्षया तृतीया को ही बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं.

• अक्षया तृतीया को दान जरूर करें.

• आज के दिन कमाया गया पुण्य अक्षय रहता है.

• त्रेता युग का आरंभ अक्षया तृतीया को ही हुआ है.

• अक्षया तृतीया को महत्वपूर्ण काम शुरू करें.

• अक्षया तृतीया साधना प्रारंभ करने के लिए खास दिन है.

• अक्षया तृतीया पितरों की शांति के लिए भी विशेष माना जाता है.

अक्षय तृतीया पर दान करें ये चीजें-

• परंपरा के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सोने का दान होता है.

• अक्षय तृतीया को भूमि, पंखा, जल, सत्तू, जौ, छाता और वस्त्र का दान होता है.

• अक्षय तृतीया के दिन गरीब को जौ दान करने से सोने के दान का फल मिलता है.

अक्षय तृतीया की पूजा का शुभ मुहूर्त –

• अक्षय तृतीया की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:07- दोपहर 12:26 बजे तक है.

• अक्षय तृतीया की पूजा का विशेष मुहूर्त सुबह 10:52- दोपहर 12:26 बजे तक है.

By: एबीपी न्यूज़

Chogadia

Choghadiya or Chogadia is used for checking auspicious time to start new work. Traditionally Choghadiya is used for travel muhurthas but due to its simplicity it is used for any muhurtha.
There are four good Choghadiya, Amrit, Shubh, Labh and Char, to start auspicious work.
Three bad Choghadiya, Rog, Kaal and Udveg, should be avoided.
The time between sunrise and sunset is called day Choghadiya and the time between sunset and next day sunrise is called night Choghadiya.
About Vaar Vela, Kaal Vela and Kaal Ratri
It is believed that no auspicious work should be done during Vaar Vela, Kaal Vela and Kaal Ratri. Vaar Vela and Kaal Vela prevail during daytime while Kaal Ratri prevails during night time. It is believed that all Manglik works done during these timings are not fruitful.
Soon the calculated chaughadiyas will be available on www.likeastro.com

Vastu Tips

अनेक बार मकान, दुकान आफिस में कई इतने छोटे-छोटे वास्तु दोष होते हैं जिससे नाना प्रकार की समस्याएं पैदा हो जाती हैं जैसे बिक्री का न होना, धन का रुक जाना, कर्जा चढ़ जाना इत्यादि निम्रलिखित उपायों से जल्द राहत मिलेगी-
A. घर की रसोई हमेशा अग्रि कोण में हो, गैस चूल्हा भी अग्रि कोण (साऊथ ईस्ट) में, खाना पूर्व की ओर मुंह करके बनाएं, शैंक (बर्तन धोने वाला) हमेशा नार्थ ईस्ट (ईशान कोण) में रखें। शयन कक्ष या रसोई में रात को झूठे बर्तन मत छोड़ें। हमेशा धो-मांज कर रखें।
B. शयन कक्ष में मदिरापान तथा कोई दूसरा व्यसन न करें, बैडरूम में कोई डरावना चित्र न लगाएं, अपने बड़े बुजुर्गों के चित्र सिर्फ लॉबी या ड्राइंगरूम में दक्षिण दिशा में लगाएं।
C. शयनकक्ष में आपका पलंग कमरे के दरवाजे के सामने न हो, पलंग का सर दक्षिण दिशा में और पैर उत्तर दिशा की ओर रहने चाहिएं।
D. घर में 3 दरवाजे आमने-सामने एक ही सीध में न हों।
E. सीढ़ी के नीचे कोई बिजली का उपकरण न हो, न ही कोई खाने-पीने का सामान होना चाहिए। सीढ़ी कभी भी पश्चिम या दक्षिण में न खुलती हो, इसके बहुत भयावह नुक्सान हैं।
F. बाथरूम भूल कर भी नार्थईस्ट (ईशान कोण) में न हो, हमेशा दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-उत्तर पश्चिम टायलेट की सीट पर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके बैठें, टायलेट में कांच के बाऊल में क्रिस्टल साल्ट (दरदरा नमक) भर कर रखें, 15 दिन बाद बदल दें, पहला टायलेट के सिंक में डाल दें। अगर किसी कारण टायलेट उत्तर-पूर्व में हो तो इसके दरवाजे पर रोअरिंग लायन का फोटो पेस्ट कर दें।
G. घर में नित्य नमक मिले पानी से पोंछा लगाएं।

Somvati Amavasya

सोमवती अमावस्या,
सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ओंकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी l
जिस अमावस्या को सोमवार हो, उसी दिन इस व्रत का विधान है।
प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है, परंतु ऐसा बहुत ही कम होता है,
जब अमावस्या सोमवार के दिन हो।
यह स्नान, दान के लिए शुभ और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
ग्रंथों में कहा गया है कि सोमवार को अमावस्या बड़े भाग्य से ही पड़ती है।
पाण्डव पूरे जीवन तरसते रहे, परन्तु उनके सम्पूर्ण जीवन में
सोमवती अमावस्या नहीं आई।
इस दिन को नदियों, तीर्थो में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है।
सोमवार चंद्रमा का दिन है।
इस दिन अमावस्या को सूर्य तथा चंद्र एक सीध में स्थित रहते हैं,
इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला होता है।
सोमवार भगवान शिवजी का दिन माना जाता है और
सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिवजी को समर्पित होती है।
इस दिन यदि गंगाजी जाना संभव न हो तो प्रात: किसी नदी या सरोवर आदि में स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करें।
अमावस्या के दिन वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है |